पेट्रोल 5 साल में सबसे महंगा, 4.5 रु. और बढ़ सकते हैं दाम; कर्नाटक चुनाव के बाद तेजी से बढ़ीं कीमतें

पेट्रोल 5 साल में सबसे महंगा, 4.5 रु. और बढ़ सकते हैं दाम; कर्नाटक चुनाव के बाद तेजी से बढ़ीं कीमतें

डीजल तो अब तक के सबसे ऊंचे दाम पर पहुंच चुक है ही, पेट्रोल भी सितंबर 2013 (76.06 रु.) के बाद सबसे ज्यादा है। 

  • 19 दिन तक दाम नहीं बढ़ने से मार्जिन 2.70 रु. से घटकर 70 पैसे रह गया
  • 4 दिनों में पेट्रोल 69 पैसे और डीजल 86 पैसे महंगा हो चुका है कर्नाटक चुनाव के बाद 
  • 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है 24 अप्रैल से 13 मई तक दाम नहीं बढ़ाने से कंपनियों को 


नई दिल्ली : कर्नाटक चुनाव में मतदान से पहले 19 दिन तक तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए, लेकिन अब तेजी से बढ़ रहे हैं। 14 मई से महज 4 दिन में दिल्ली में पेट्रोल 69 पैसे व डीजल 86 पैसे महंगा हो चुका है। गुरुवार को यहां पेट्रोल 75.32 रुपए व डीजल 66.79 रु. लीटर रहा। डीजल तो अब तक के सबसे महंगे दाम पर पहुंच चुका है, वहीं पेट्रोल भी सितंबर 2013 (76.06 रु.) के बाद सबसे ज्यादा है। ब्रोकरेज फर्म कोटक इक्विटीज का कहना है कि 19 दिनों तक दाम नहीं बढ़ाने से तेल कंपनियों का मार्जिन कम रह गया है। पहले ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन 2.70 रु. लीटर था, जो अब 50 से 70 पैसे है। अगर तेल कंपनियां चुनाव से पहले के मार्जिन पर जाएं तो पेट्रोल 4 से 4.55 रुपए और डीजल 3.5 से 4 रुपए तक महंगा हो जाएगा। 

अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क रेट 5.6% तक बढ़े
देश में कीमत 1.3% तक बढ़ी भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क रेट के हिसाब से रोजाना दाम तय करती हैं। 24 अप्रैल को पेट्रोल का बेंचमार्क रेट 78.84 डॉलर था जो अब 5.65% बढ़कर 83.30 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। डीजल का रेट 84.68 डॉलर से 5% बढ़कर 88.93 डॉलर हुआ है, लेकिन इस दौरान दिल्ली में पेट्रोल के दाम 0.92% और डीजल के 1.3% बढ़े हैं। 
 विधानसभा चुनावों से पहले मार्जिन बढ़ाएंगी 
ईरान पर प्रतिबंध और ग्लोबल डिमांड बढ़ने से कच्चे तेल के दाम आगे भी ऊंचे बने रहेंगे। मप्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान व उत्तर-पूर्व के 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। कंपनियां इससे पहले मार्जिन बढ़ाना चाहेंगी। 
मार्जिन बढ़ाएंगी कंपनियां 
ईरान पर प्रतिबंध और ग्लोबल डिमांड बढ़ने से कच्चे तेल के दाम आगे भी ऊंचे बने रहेंगे। मप्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान व उत्तर-पूर्व के 4 राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। कंपनियां इससे पहले मार्जिन बढ़ाना चाहेंगी।